शनिवार, 18 नवंबर 2017 | 11:55 IST
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स्मॉग क्या है जानिये इसके बारे में कैसे बचा सकते है अपने आपको


देश के कोने-कोने में वायु प्रदुषण की वह अवस्था जहाँ सामान्य रुप से सांस लेना भारी पड़ जाता है। उसे आज के युग में स्मॉग का नाम दिया गया है। बड़े-बड़े शहरों में यातायात साधनों से निकला हुआ धुँआ, कलकारखानों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला काला धुँआ, खेतों में पराली दहन की धुँआ, प्रकाश रसायनिक पदार्थों से निकलने वाली जहरीली गैसे और तो ओर हल्की – हल्की धुल के कण से मिलकर प्रदुषित वातावरण में ठण्डी के दिनों में स्मॉग का रूप ले लेता है। ज्यादातर इसमें मौजूद काली धुँआ, सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड और खतरनाक जहरीली गैसे जो सम्पूर्ण वातावरण को नुकसान पहुँचाती है। साथ-साथ ही मावन की बात करें तो या वातावरण में रहने वाले जीव जन्तुओं की। सभी को इससे खतरा हैं।

आपको बताते है स्मॉग के लक्षण और पहचान

सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं। लोगों की आंखें जल रही हैं तो समझों की कुछ न कुछ गड़बड़ है।

स्मॉग से खांसी, ब्रॉन्काइटिस, दिल की बीमारी, त्वचा संबंधी रोग, बाल झड़ना, आंखों में जलन, नाक, कान, गला, फेफड़े में इंफेक्शन, ब्लड प्रेशर के रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक की समस्या हो सकती है। दमा के रोगियों को अटैक पड़ सकता है।

आईये बताते है कैसे बचा जा सकता है इससे ?

• जब एक्यूआई इंडेक्स 150 से ज्यादा होने पर ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी वाली एक्सरसाइज, क्रिकेट, हॉकी, साइकलिंग, मैरॉथन ना करें।

• जब प्रदूषण का स्तर के 200 से ज्यादा होने पर पार्क में भी दौड़ने और टहलने ना जाएं।

• जब प्रदूषण का स्तर 300 से ज्यादा हो तो लंबी दूरी की वॉक ना करें।

• जब स्तर 400 के पार हो तो घर के अंदर रहें,

• सामान्य वॉक भी ना करें।  

• घर के भीतर रहें।

• प्रदूषण स्तर 1000 पर होने पर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात होते हैं। इस स्तर पर बिल्कुल भी घर से बाहर ना निकलें, घर पर ही रहें।

ऐसे बचे स्मॉग से  

• भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें। स्मॉग के दिनों में 4-5 लीटर पानी जरूर पीये।

• खाने-पीने पर विशेष ध्यान दें। जैसे की विटामिन-सी, ओमेगा-3 को प्रयोग में लाएं। शहद, लहसुन, अदरक का खाने में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। खांसी, जुकाम की स्थिति में शहद और अदरक के रस का सेवन करें।

• यदि आप घर के बाहर से आते हो तो आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें।

• ठण्डी के दिनों में गुड़ का जरूर सेवन करें।

• घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें या अपने मुंह और नाक को किसी कपड़े से बांधकर निकले।

खबरों की माने तो देखिए

• दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में एक्यूआई इंडेक्स 1000 के पार चला गया है।

• ठंडी के मौसम में लंदनवासी खुद को गर्म रखने के लिए सामान्य से ज्यादा कोयला जलाते थे। इसने धुएं में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ा दी। ग्रेटर लंदन में कोयले से चलने वाले कई पावर स्टेशन भी थी जिससे प्रदूषण बढ़ा। 4 दिसंबर, 1952 को जब लंदन में मौसम बदला तो स्मॉग की एक घनी परत शहर में छा गई। 



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