रविवार, 25 जून 2017 | 05:44 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
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कृष्ण को मत आने दो !!


कृष्ण को मत आने दो !!

कराहने दो

मेरे प्रेम को

उस भीष्म की तरह

बाणों की शय्या पर

बेबस

इच्छा मृत्यु से अभिशप्त

सूरज की ओर अपने मौत के लिए देखता..

एकटक और कराहता !!

सिसकने दो

मेरे प्रेम को

उस द्रौपदी की तरह

भरी सभा में

चीखती

अपने पतियों से छलित

कृष्ण को पुकारती....

एकटक और सिसकती !!

तड़पने दो

मेरे प्रेम को उस कर्ण की तरह

कुरुक्षेत्र के मैदान में

असहाय

अपने अस्तित्व के लिए

अधर्म की तरफ से लड़ता...

एकटक और तड़पता !!

जलने दो

मेरे प्रेम को

उस दुर्योधन की तरह

हस्तिनापुर के सौंदर्य में

चौंधता, खीजता

अपनी महत्वाकांक्षा की ओर देखता....

 

एकटक और जलता !!

 

झुलसने दो

मेरे प्रेम को

उस युधिष्ठिर की तरह

धर्म के नशे में धुत्त

अपनों के शवों की ओर देखता...

 

एकटक और झुलसता !!

मगर मत आने दो किसी कृष्ण को

अन्यथा

फँस जायेगा मेरा प्रेम

धर्म और अधर्म में

नीति और अनीति में

सच और झूठ में

सही और गलत में

और ये महाभारत ख़त्म हो जायेगा

सब ख़त्म हो जायेगा !!

 

साहित्य मंजूरी से मनोरंजन चौधरी की कविता 



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