बुधवार, 19 जून 2019 | 12:42 IST
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पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने को लेकर असमंजस बरकरार


फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से दो हफ्ते पहले हो रही जीएसटी परिषद की मीटिंग से आम लोगों को कई मोर्चों पर राहत मिलने की उम्मीद है। बता दें, कि जीएसटी परिषद की इस मीटिंग में रियल इस्टेट समेत कई अन्य मोर्चों पर राहत दे सकती है और इसी दौरान सबसे ज्यादा इंतजार लोगों को पेट्रोल और डीजल को लेकर किसी फैसले का होगा। क्योंकि पेट्रोल और डीजल को अभी तक जीएसटी के दायरे में नहीं लाया गया है। इसे लेकर अभी तक असमंजस बरकरार है। 

 


बता दें, कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना तभी संभव हो पाएगा, जब सभी राज्य इस पर अपनी सहमति नहीं दे देते हैं। वहीं इस मीटिंग में 70 से 80 सेवाओं और उत्पादों के जीएसटी रेट में कटौती की जा सकती है। वित्त मंत्री  अरुण जेटली समेत सरकार के कई नेता रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत लाने की बात कह चुके हैं. इस बैठक में रियल इस्टेट को जीएटी के दायरे में लाने पर कोई बड़ा फैसला हो सकता है और दूसरी ओर जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कई राज्यों में जहां पेट्रोल ने 80 रूपये तो डीजल ने 65 रूपये का आंकड़ा पार कर लिया है। 

 


ऐसे समय में हो रही जीएसटी परिषद की इस बैठक में पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने को लेकर चर्चा होना तय है। उम्मीद की जा सकती है कि अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर कोई सहमति नहीं बनती है, तो इस पर सकारात्मक चर्चा  भी हो सकती है। साथ ही खेती से जुड़े उत्पाद, घरेलू चीजें और सिंचाई से जुड़ा सामान की कीमतों को कम करने पर बात हो सकती है। वहीं जीएसटी रिटर्न फाइल करने के लिए सिंगल फॉर्म पर बहस हो सकती है क्योंकि अभी कारोबारियों को जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2 जैसे कई फॉर्म को भरना पड़ता है।

 



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