मंगलवार, 22 अगस्त 2017 | 03:07 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
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भारत तेरी महिमा,अनंत


भारत तेरी महिमा,अनंत

श्रवण सेमवाल

मत रोक मुझे ऐ धरती के जनमानस गाथा गाने को
मत रोक मुझे लिख जाने दे तू, आने वाली बाधा को 
मैं जान सका न पहचान सका, इस सृष्टि के भूतल को 
मन चिंतित, उदास, अकेला है लेकर आने वाले कल को 

आखिर क्या संदेश दे रहे आने वाली पीढ़ी को
रोती धरा, खोती संस्कृति, परंपरा की सीढ़ी को
अब बांध सके तो बाध ले, तू, अनुशासन की नय्या को 
पार लगा सके तो लगा इस कलियुगी कन्हैया को

जग के जगमग में जन जीवन के जीने की ज्वाला हो
भले प्रकट हो शुंभ- निशुंभ हाथो में भला हो
अरे छल से छलने वाले छल युद्धमो से भारत कभी आहत नही हुआ 
गुलाम रहे पर गुलामी ने भारतीयता को नही छुआ

हजारो सड़त्रो से भी भारत को मिटा सकें 
अरे इतिहास खंगालों ओर 
देखो मिटाने वाले कितने थे 
सब मिट गए मर लेकिन भारत आज भी अजे्य है, अमित है अद्धितिय है 

भारत माता की जय, वन्दे मातरम



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