शनिवार, 24 जून 2017 | 04:00 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
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साहित्य

फ्योंली दास स्टीफन फ्योल समर्पित रचना

फ्योंली दास स्टीफन फ्योल समर्पित रचना जोग ## जै ढोल दमौ कु हमुन नि जाणी क्वी मोल देखादी कन्नु भलु बजाणु अमरिका कु स्टीफन फ्योल और पढ़ें »

भारत विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर निष्पक्षता सुनिश्चित करने का दृढ़ संकल्प

मार्टिन लूथर किंग ने कहा था कि जहां भी अन्याेय होता है वहां न्याोय को खतरा है। यह केवल वैधानिक न्याय के बारे में ही नहीं... और पढ़ें »

श्रोताओं के मन को स्पर्श करती है रेडियो की ध्वनि...

जब नील नदी की लहरों की कलकल सी गुनगुनाती ध्वनि ‘’मुझे छूती है, तुम्हें छूती है’’ तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे मधुर स्वदरों में कोई कैरॉल गा रहा हो, ऐसे ही रेडियो की ध्वनि.... और पढ़ें »

क्या कोई स्त्री किसी पुरूष का हरण कर सकती, प्रेम की यह कैसी अदभुत कहानी......

चित्रलेखा ने द्वारिका जाकर सोते हुये अनिरुद्ध को पलंग सहित उषा के महल में पहुँचा दिया। नींद खुलने पर अनिरुद्ध ने स्वयं को एक नये स्थान पर पाया और देखा कि उसके पास एक अनिंद्य सुन्दरी बैठी हुई है। अनिरुद्ध के पूछने पर उषा ने बताया कि वह वाणासुर की पुत्री है और अनिरुद्ध को पति रूप में पाने की कामना रखती है। और पढ़ें »

जाने असल में कौन और कैसी थी रानी पद्मावती , पूरी कहानी इतिहास के पन्नों से

बादशाह ने जब सुना तब अपनी सेना सहित पीछा किया। गोरा बादल ने जब शाही फौज पीछे देखी तब एक हजार सैनिकों को लेकर गोरा तो शाही फौज को रोकने के लिए डट गया और बादल राजा रत्नसेन को लेकर चित्तौर की ओर बढ़ा। वृद्ध वीर गोरा बड़ी वीरता से लड़कर और हजारों को मार कर अंत में सरजा के हाथ से मारा गया। इस बीच में राजा रत्नसेन चित्तौर पहुँच गया। पहुँचते ही उसी दिन रात को पद्मिनी के मुँह से रत्नसेन ने जब देवपाल की दुष्टता का हाल सुना तब उसने उसे बाँध लाने की प्रतिज्ञा की। और पढ़ें »

क्यों मानता है हिन्दू सूतक और पातक की परंपरा को जाने, आखिर क्या है राज

भारत एक ऐसा देश है जो विविध धर्म, पंथ ओर संप्रदायों का गढ़ माना जाता है यहां की रीति-नीति और संस्कृति का वाहक समस्त भू-चरा चर है यही कारण है कि भारत के तीज त्यौहारो को विश्व भी आदर्शता के साथ मनाता है। और पढ़ें »

समाज साहित्य में जीवित रहता है, और साहित्य भाषा में

माना जाता है कि सहित्य, संगीत, और कला से विहीन व्यक्ति दंतहीन शेर के समान होता है, इसके लिए यह उक्ति भी कहीं गई है कि “साहित्य, संगीत, कला, विहीन: साक्षात पशु पुच्छ विषाण हीन: लेकिन किसी भी साहित्य की गुणवत्ता और प्रतिबिंब का स्वभाव उस लेखक के रवैये पर निर्भर करता है कि क्या वह अपने आउटलुक या प्रतिक्रियावादी में प्रगतिशील है। और पढ़ें »

टेक ओवर (कहानी)

“एक पुरुष और एक महिला के बीच की केमिस्ट्री को कोई नहीं समझ ... और पढ़ें »

विश्व पुस्तक मेले में दिखी महिलाओं की धूम

थीम से जुड़ा एक कलेंडर भी प्रकाशित किया गया है जिसे 10 जनवरी को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जारी करेंगे। और पढ़ें »

भारत तेरी महिमा,अनंत

अरे इतिहास खंगालों ओर देखो मिटाने वाले कितने थे सब मिट गए मर लेकिन और पढ़ें »

उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और सभ्यता का वाहक है उत्तराय़णी मेला

मान्यता है कि इस दिन सगंम में स्नान करने से पाप कट जाते है। बागेश्वर दो पर्वत शिखरों के बीच स्थित है इसके एक ओर नीलेश्वर तथा दूसरी ओर भीलेश्वर शिखर विद्यमान हैं। बागेश्वर समुद्र तट से लगभग 960 मीटर की ऊचांई पर स्थित है। उत्तरायणी मेला सम्पूर्ण कुमायुं का प्रसिद्ध मेला है। और पढ़ें »

मंगलमय हो नववर्ष

पूरब से उतरी नव किरणें प्रदीप्त हुआ प्रभाकर नवीन आज प्रभात के घाट पर परिदृश्य हैं नवनीत शरद ने श्रृंगार किया और पढ़ें »

कृष्ण को मत आने दो !!

जलने दो मेरे प्रेम को उस दुर्योधन की तरह हस्तिनापुर के सौंदर्य में चौंधता, खीजता अपनी महत्वाकांक्षा की ओर देखता.... और पढ़ें »

संघर्ष और प्रेरणा से ओत-प्रोत था हरिवंश राय श्रीवास्तव बच्चन का जीवन

जीवन की भाग-दौड़ में क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है, हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी, आम हो जाती है। जी हां ऐसे ही थे हिन्दी के महाकवि हरिवंश राय श्रीवास्तव "बच्चन। और पढ़ें »

बुद्ध की वापसी: मैनपाट

मैनपाट की यात्रा सिर्फ आंख और मन की भूख, तृष्णा मिटाने भर की नहीं है, यहां प्रकृति से संगीत फूटता है, जिसके स्वर सघन वन में गुंजते हैं। यह प्रकृति के उस रहस्यात्मक एवं अद्भुत व्यक्त वैभव को अनुभव करने की यात्रा है। पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में आने के साथ ही यात्रा आरम्भ हुई, जो कि आज तक निर्वाध गति से चल रही है। हर जीव अपने स्तर पर और पढ़ें »
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